झुरळ / खटमल / छिपकलि

झुरळ / खटमल / छिपकलि

***** झुरळ =

झुरळांच्या शरिरातून बाहेर पडणार्‍या घातक घटकांमुळे डायरिया किंवा अन्नात विषबाधा होण्याची शक्यता असते. माणूस आणि इतर असंख्य प्राणी यांचे डोके धडापासून वेगळे झाले, की ते जागीच मरतात. झुरळे मात्र त्यांचे मुंडके तुटले तरी जवळपास एक महिनाभर जगू शकतात. झुरळाच्या शरीरात रक्तदाबाची संकल्पनाच नसते. त्यामुळे डोके उडाल्याने त्याला काही फरक पडत नाही. तसेच एकदा अन्न खाल्ले, की झुरळाला ते जवळपास महिनाभर पुरते. साहजिकच डोके उडाल्यावर सुद्धा ते कित्येक दिवस जगू शकते.

* अन्न दुषित होते -
झुरळं काहीही खाऊन जीवंत राहू शकतात. आपण खात असलेल्या साध्या अन्नापासून ते मृत वनस्पती , प्राणी व अगदी साबण ,गम,पेपर ,गळलेले केस यांवर देखील झुरळं जगू शकतात. तसेच रात्रीचे फिरताना ते उघड्या अन्नावर मृत त्वचा ,केस व अंड्याची कवच टाकून त्यांना प्रदुषित करतात.

* विविध आजारांना आमंत्रण देतात -
झुरळांच्या आतड्यांमध्ये असलेल्या बॅक्टेरियांमुळे मुत्रमार्गात संसर्ग ,पचनाचे विकार अधिक प्रमाणात बळावण्याची शक्यता अधिक असते. झुरळं अन्नाजवळ फिरकल्याने त्याच्या लाळेतून काही बॅक्टेरिया जातात व त्यामुळे अन्न प्रदुषित होते.

* झुरळं चावू शकतात -
झुरळातील काही प्रजाती , मानावी शरीराचा चावादेखील घेऊ शकतात. झुरळाची ही प्रजात अपवादानेच आढळते मात्र जर तुमच्या घरात अशाप्रकारचे झुरळ आढळल्यास विशेष काळजी घ्या. कारण शरीराच्या मऊ त्वचा असलेल्या भागात जसे की, बोटे,पायाचा अंगठा अशा जागी चावा घेतल्याने जखम होँण्याची शक्यता असते.

* शरीरात प्रवेश करतात -
झुरळं फक्त तुमच्या अन्नात नाही तर शरीरात देखील प्रवेश करू शकतात. अनेकदा झोपेत झुरळं तुमच्या नाकात किंवा कानात प्रवेश करतात. तर छोट्या आकाराची झुरळं , तुम्ही गाढ झोपेत असताना तुमच्या शरीरात थेट प्रवेश करू शकतात.

* अन्नात विषबाधा होते -
विषबाधेच्या साथीमध्ये असे आढळून आले की, जर झुरळांचा प्रादुर्भाव कमी झाला तर विषबाधेची समस्यादेखील आटोक्यात येण्यात मदत होते. झुरळांमुळे अनेक बॅक्टेरिया अन्नात मिसळून विषबाधा किंवा टायफाईडचा प्रसार होण्याची शक्यता वाढते.

* अ‍ॅलर्जी -
झुरळांमुळे अ‍ॅलर्जी होण्याची शक्यता असते. त्यांच्या लाळेतून व शरिरावरून शेकडो प्रकारच्या अ‍ॅलर्जी होण्याची शक्यता असते. यामुळे त्वचेवर रॅशेस येणे , डोळ्यांतून पाणी येणे ,सतत शिंका येणे अशी लक्षणं दिसू शकतात.

* अस्थमा -
अस्थमाच्या रुग्णांसाठी झुरळं फारच त्रासदायक ठरू शकतात. जर अशा रुग़्णांच्या आसपास झुरळांचा वावर अधिक असेल तर त्यांना अस्थमाचा अटॅक  येण्याची शक्यता अधिक असते. तसेच झुरळांमुळे होणार्‍या अ‍ॅलर्जींमुळे गुंतागुंतीचे आजार वाढतात. तसेच काहींमध्ये हे जीवावर देखील बेतू शकते. ज्यांना अस्थम्याचा त्रास नाही त्यांच्यामध्ये या आजाराचा नव्याने प्रादुर्भाव होऊ शकतो.

***** झुरळांपासून मुक्ती

* काळी मिरे, कांदे आणि लसूनची पेस्ट करून त्यात पाणी टाका आणि एक सोल्युशन तयार करा. ते झुरळ असलेल्या जागांवर स्प्रे करा. याचा वासाने झुरळ घर सोडून पळून जातील.

***** झुरळांना घराबाहेर ठेवण्यासाठी हे काही उपाय करा -

* झुरळांपासून सुटका हवी असल्यास , तुमचे घर  नियमित स्वच्छ ठेवा. दर आठवड्याला संपुर्ण घराची  स्वच्छता केल्यास  झुरळांचा प्रादुर्भाव कमी होण्यास मदत होईल.
* झोपण्यापुर्वी सिंक व  ओटा  स्वच्छ करून मगच झोपा.
* किचनमधील  कचर्‍याचा डबा नियमित स्वच्छ करा व तो झाकून  ठेवा. कारण घाण म्हणजे झुरळांना फुकटचे आमंत्रण असते.
* आठवड्यातून एकदा फ्रिज साफ करा. तसेच रात्रीच्या वेळेस अन्न  झाकून ठेवा.
* जुनी वर्तमानपत्र ,पुस्तक उघड्यावर रचून  ठेवू नका.
* झुरळांना मारण्यासाठी बाजारात उपलब्ध असलेली औषध , स्प्रे यांचा जरूर वापर करा. यामुळे तुम्ही त्यांना तात्काळ मारू शकता.
* घरात झुरळ त्रास देत असतील तर किचन आणि  घराच्या कोपर्यातत बोरिक पावडर टाका. झुरळ पुन्हा घरात येणार नाहीत
* तुमच्या घरात झुरळं प्रवेश करू शकतील अशा जागा बंद करून टाका. भिंंतींवरील भेगा, छिद्रं सारी कायमची व पुर्णपणे बंद करा. यामुळे ती तुमच्या घरात कायमची वास्तव्य करू शकणार नाहीत.
* घरात खुपच झुरळांचा प्रादुर्भाव झाला असल्यास , पेस्टकंट्रोल करून घ्या.

****** खटमल =

खटमल बहुत ही सूक्ष्म जीव होते हैं जिसकी वजह से इन्हें ढूढ़ना और घरेलु नुस्खों द्वारा इन्हें मारना एक बेहद जटिल काम होता है। आप सोच रहे हैं होंगे कि आखिर इन खटमलों से पीछा छुड़ाना इतना मुश्किल क्यों है? तो आपको बता दे कि एक मादा खटमल अपने पूरे जीवनकाल में लगभग 500 अंडे देती है, और उन अण्डों से निकले बच्चे आगे जाकर और अंडे देते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी इनकी संख्या बढ़ती जाती है और आपके बिस्तर में इनका एक छोटा सा झुंड एक पूरे समुदाय में तब्दील हो जाता है जिसके चलते इनकी संख्या को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल हो जाता है।  खटमलों से पीछा छुड़ाना इस कारण से भी मुश्किल है क्योंकि ये लम्बे समय तक बिना खाए भी रह सकते हैं। इसीलिए ये कभी भी भोजन की कमी से नहीं मरते और न ही इन्हें ज़िंदा रहने के लिए किसी होस्ट की ज़रूरत होती है।

* पुदीना =
खटमल पुदीना की गंध को सहन नहीं कर पाते हैं। तो कुछ पुदीने की पत्तियां लें और अपने बिस्तर के पास रख दें। अगर आपके घर में छोटे बच्चे हैं तो कुछ पुदीना के पत्ते उनके पलने में रख दें। पुदीने के पत्ते खटमलों को दूर रखते हैं। आप चाहें तो पुदीने के पत्तों को पीस कर अपने शरीर पर भी मल सकते हैं।

* कायेन पेपर(लाल मिर्च) =
कायेन पेपर गिनी राज्य की लाल मिर्च है। इसे बर्ड पेपर, काऊ हॉर्न पेपर और अलेवा भी कहते हैं। इससे खटमल बहुत जल्दी भागते हैं। आप इन मिर्चों का पाउडर बना कर खटमलों पर स्प्रे कर सकते हैं।

* लैवेंडर =
खटमल लैवेंडर की महक सहन नहीं कर पाते हैं। इसीलिए आप लैवेंडर के पत्तों को खटमल वाले कपड़ों पर रगड़ सकते हैं या लैवेंडर का परफ्यूम छिड़क सकते हैं।

* रोज़मेरी =
लैवेंडर की ही तरह खटमल रोजमेरी की खुशबु भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। आप रोजमेरी का स्प्रे बनाकर भी इन पर छिड़क सकते हैं।

* नीलगिरी =
नीलगिरि, औषधीय गुणों के अलावा खटमल मारने में भी सक्षम है। आप इसकी कुछ बूँदें खटमलों पर छिड़क सकते हैं। आप नीलगिरि के तेल, रोजमेरी और लैवेंडर का स्प्रे बनाकर खटमलों से हमेशा के लिए मुक्ति पा सकते हैं।

* बीन की पत्तियां =
बीन की पत्तियां को पुराने ज़माने से खटमलों से मुक्ति पाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालाँकि हमलोगों को इसके चमत्कारी गुणों के बारे में पता नहीं है पर एक नए शोध के अनुसार, बीन की पत्तियां खटमलों का नाश कर देती हैं।

* काले अखरोट की चाय =
काले अखरोट के पेड़ का इस्तेमाल चाय बनाने के लिए किया जाता है। इसमें एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण हैं जिसकी वजह से ये खटमलों को मारने में कारगर साबित होता है। खटमल और उनके अंडे को मारने के लिए घर के सभी कोनों में आप काले अखरोट के टी-बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं। ज्ञात कि इन बैग्स को अपने पालतू जानवरों की पहुंच से आप दूर ही रखें तो बेहतर है।

* टी ट्री स्प्रे =
टी ट्री का तेल अपने एंटी माइक्रोबियल प्रभाव के लिए जाना जाता है। यह खटमलों से निजात पाने के लिए भी कारगर मन जाता है। टी ट्री के तेल की एक बड़ी बोतल ख़रीदें। उसमें थोड़ा सा पानी मिलकर उसे पतला कर लें। अब इस स्प्रे को बोतल में भरके दीवार, पलंग, अलमारी, पर्दे, फर्नीचर, गद्दे, कपड़े सभी चीज़ों में छिड़कें जहाँ आपको लगता है की खटमल मौजूद हैं। एक हफ्ते लगातार ये छिड़काव करने से आप खटमलों से हमेशा के लिए पीछा छुड़ा पाएंगे।

* नीम का तेल =
नीम का तेल उत्तर भारत में पाए जाने वाले नीम के पेड़ से निकाला जाता है। इसमें कई एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं जिसकी वजह से इसका इस्तेमाल कीड़ों को दूर रखने के लिए किया जाता है। नीम का तेल आपको किसी भी दवा की दुकान पर मिल सकता है। नीम के तेल को आप डाइल्यूट न करें। इसका इस्तेमाल इसके शुद्ध रूप में खटमलों पर किया जाना चाहिए। घर की सभी चीज़ों पर इसका छिड़काव करें और डिटर्जेंट के साथ इस तेल को मिलाकर ही कपडे धोएं। एक हफ्ते लगातार इसका छिड़काव करें।

* थाइम (अजवाइन के फूल) =
थाइम इटली की एक लोकप्रिय बूटी है जिसका इस्तेमाल खाने में ज़ायका बढ़ने के लिए किया जाता है। थाइम खटमलों पर सीधा असर नहीं करता पर इसकी गंध को खटमल सहन नहीं कर पाते। इसकी गंध से वो खुद ही संक्रमित जगह से निकल जाते हैं। थाइम की पत्तियों को जालीदार बैग में डालकर खटमलों से संक्रमित जगह पर छोड़ दें। हर तीसरे दिन बैग की पत्तियों को ताज़ा पत्तियों से बदलें।

* स्वीट फ्लैग =
स्वीट फ्लैग को कलामस भी कहते हैं। इसका इस्तेमाल रसायन आधारित कीटनाशक में होता है। इसमें एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं जिसकी वजह से ये खटमल जैसे जीवों को दूर रखता है। इससे बना हर्बल कीटनाशक किसी भी किचन गार्डन से सम्बंधित दुकानों में मिल जाएगा। बस स्वीट फ्लैग के पाउडर को लाकर, उसके पैकेट पर लिखे निर्देशों को पढ़कर उसका घोल बना लें और अपने घर के कोनो में और खटमल से संक्रमित जगहों पे छिड़काव करें। ध्यान रहे कि आप गलती से भी इसका सेवन न करें बहुत हानिकारक होता है ।

* चारपाई के चारों पायों पर अजवाइन की 4 पोटली बांधने से खटमल भाग जाते हैं।

1) वैक्‍कयूमिंग करना -
आप बिस्‍तरों की वैक्‍कूयमिंग करें। इससे सारे कीट भाग जाएंगे। चाहें तो सभी को निकालकर अलग-अलग करके अच्‍छे से झाड़ दें और फिर बिछाएं। ऐसा हर दिन करने से सप्‍ताह भर में सारे कीड़े-मकोड़े भाग जाएंगे। कमरे के पर्दे से लेकर कालीन तक को झाड़कर बिछाएं।
2) धुलना -
अगर आपके कमरे में इस्‍तेमाल की जाने वाली चीज धुली जा सकती है तो उसे गर्म पानी में डिटॉल डालकर धुल दें जैसे- बेडशीट, पर्दे, कवर आदि। इससे कीट और खटमल दूर भाग जाएंगे और सफाई भी हो जाएगी। इसके बाद सभी को अच्‍छी तरह सुखाने के बाद बिछाएं।
3) धूप दिखाएं -
जिन बिस्‍तरों में कीड़े या खटमल आदि हो गए हों, उन सभी को धूप में रख दें। सारा दिन कड़ी धूप में सुखाने के बाद बिछाएं, इससे बिस्‍तरों की गर्माहट से सारे कीट मर जाएंगे या भाग जाएंगे। सीधी धूप लगने वाले गद्दे, चादर, ताकिया आदि में छुपे हुए कीड़े भी भाग जाते है।
4) ड्रॉयर -
अगर इतना सब कुछ करने के बाद भी नन्‍हे कीड़े नहीं निकलते है तो आप इन सभी बिस्‍तरों पर ड्रॉयर चला दें। ड्रॉयर की गर्म हवा से सारे कीट मर जाएंगे, ऐसी गर्म हवा काफी प्रभावी होती है।
5) प्राकृतिक कीटनाशक -
आप इन कीटों को मारने के लिए किसी भी प्राकृतिक कीटनाशक का इस्‍तेमाल कर लें। पर बच्‍चों और पालतू जानवरों की इनकी पहुंच से दूर रखें। डीडीटी पाउडर आदि को न छिड़कें, इसके छिड़काव से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा रहता है।
6) दालचीनी का तेल / लैवेंडर ऑयल -
दालचीनी का तेल, कीटों को मारने के लिए खासा प्रसिद्ध है। इसे आप स्‍प्रे की बॉटल में भरकर कीटों पर स्‍प्रे कर सकते है जिससे वह मर जाएंगे।
7) लैवेंडर ऑयल -
लैवेंडर ऑयल भी कीटों को बिस्‍तरों, सोफे आदि से दूर भगा देता है क्‍योंकि इसकी महक कीटों को पसंद नहीं आती है। वास्‍तव में इंसानों को लैवेंडर की महक बहुत भाती है लेकिन कीटों को इस महक से एलर्जी होती है और वह भाग जाते है।

***** छिपकलि =

* कॉफी पाउडर कॉफी पाउडर को तम्‍बाकू पाउडर के साथ मिला लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाकर वहां-वहां रख दें जहां छिपकलियां आती है। अगर छिपकलियां इस मिश्रण को खा लेगी तो वह मर जाएगी, वरना वह भाग अवश्‍य जाएगी।
* नेफ्थलीन गोलियां नेफ्थलीन की गोलियां, एक अच्‍छी कीटनाशक होती है, इसे वार्डरोब, वॉशवेसिन आदि में डाला जाता है। इसे जहां भी रख देगें, वहां छिपकली नहीं आएगी।
* पिपर पेस्टीसाइड स्‍प्रे पानी और काली मिर्च के पाउडर को मिला लें और एक पेस्‍टीसाइड तैयार कर लें। इसे अपनी किचेन, कमरों और बाथरूम अदि जगहों पर छिड़क दें। इससे छिपकलियां भाग जाती है क्‍योंकि काली मिर्च की तीखी गंध उन्‍हे अच्‍छी नहीं लगती है।
* प्‍याज प्‍याज को स्‍लाइस में काटकर उसे धागे में बांधकर लाइट्स आदि के पास लटका दें, इससे वहां आने वाली छिपकली भाग जाएगी। प्‍याज में सल्‍फर ज्‍यादा मात्रा में होता है जिससे बुरी दुर्गंध निकलती है और छिपकली भाग जाती है।
* लहसून एक स्‍प्रे बॉटल लें। इसमें प्‍याज का रस और पानी भर लें। इसमें कुछ बूंद लहसून के रस की मिला लें और अच्‍छे से मिला लें। अब इसे घर के हर कोने में छिड़क दें, जहां-जहां छिपकली सबसे ज्‍यादा आती है वहां भी छिड़क दें। आप चाहें तो लहसून की कली भी रख सकते है, इससे भी छिपकलियां दूर भाग जाती है।

Comments

  1. मैं आपको कुछ खटमल मारने के उपाय बताते हूँ. ये उपाय मैंने भी अपनाये हैं और ये घरेलू उपाय हैं.
    1. पुदीने की पत्ती
    2. कायेन पेपर (लाल मिर्च)
    3. लैवेंडर और रोज़मेरी
    4. नीलगिरी
    5. बिन की पत्तियाँ

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